Kamuk Wine
मेरी माँ कामिनी - भाग 33 ( कुछ मिनट पहले: बगीचे में ) रमेश नशे में धुत होकर कुर्सी पर झूल रहा था। उसके हाथ…
Read moreमेरी माँ कामिनी - भाग 32 कामिनी ने बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और अपनी पीठ उससे टिका दी। उसकी सांसें…
Read moreमेरी माँ कामिनी - भाग 31 माहौल में अब सिर्फ़ मटन पकने की खुशबू नहीं थी, बल्कि दो जिस्मों के जलने की गंध भी थ…
Read moreमेरी माँ कामिनी - भाग 30 अगली सुबह का सूरज निकला, लेकिन रमेश के घर के ऊपर काले बादल मंडरा रहे थे। रमेश की आ…
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