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नागमणि -3

 अपडेट -3

चैप्टर 1, ठाकुर कि शादी


काली पहाड़ी से 2km दूर मंदिर मे रूपवती तांत्रिक कि तरफ बढ़ती है और हाथ जोड़ के धन्यवाद करती है

रूपवती :- धन्यवाद बाबा मुझमे विश्वास पैदा करने के लिए, मेरे अंदर कि नारी को जगाने के लिए

मै आपका आर्शीवाद जरूर प्राप्त करूंगी, आपका वीर्य ग्रहण करूंगी

तांत्रिक :- इतना आसान नहीं होगा ठकुराइन मेरा आशीर्वाद पाना

रूपवती :- मै इस कुरूपता को त्यागने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ बाबा, उस ठाकुर ज़ालिम सिंह ने मुझे मेरी कुरूपता कि वजह से त्यागा है उसको सबक सिखाने के लिए, असली रूपवती बनने के लिए मै किसी भी हद तक जा सकती हूँ

ऐसा सुन के तांत्रिक उलजुलूल अपने स्थान पे बैठ गया, जो कि पत्थर का कुर्सीनुमा सिंघासन था

तांत्रिक अपने दोनों पैर फैला के बैठ गया जिस वजह से उसका 12इंच का लिंग दोनों पैर के बीच किसी सांप कि तरह झूल रहा था


ये नजारा देख रूपवती सिहर उठती है साथ ही मन मे एक मदहोसी सी उठती है इतने बड़े लिंग को देख कर

रूपवती आगे बढ़ती है और पास रखे कटोरे को तांत्रिक के लिंग के नीचे रख देती है और बाबा को प्रणाम करती हुई पीछे हटती है..

आज उसे वो काम करना था जो आजतक नहीं किया था

रूपवती तांत्रिक कि आँखों मे देखती है और धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू सरका देती है जिस वजह से रूपवती के बड़े बड़े काले स्तन कि घाटिया उभर के सामने आ जाती है

तांत्रिक एक टक स्तन को घूरने लगता है लेकिन चेहरे पे कोई भाव नहीं आता, आंखे पथराई सी रहती है.

रूपवती मन मे :- कैसा पत्थर इंसान है ये तांत्रिक

साथ ही अब अपनी पूरी साड़ी खोल चुकी थी, रूपवती समझ चुकी थी कि ये उसकी परीक्षा है उसे अपने शरीर से एक पत्थर को पिघला के उसका रस निकालना था.


वही रंगा बिल्ला के अड्डे पर रुखसार कामवासना मे जल रही थी, हवस से उसकी आंखे लाल हो गई थी उसकी चुत और गांड मे लगातार रंगा और बिल्ला कि जबान चल रही थी

दोनों ही उसकी गांड से शराब निकाल लेना चाहते थे.

रंगा अपनी जीभ को आगे से तिकोना करता है और पूरीजीभ रुखसाना कि चुत मे घुसा के आगे पीछे करने लगता है

रुखसार के धैर्य का अब कोई ठिकाना ही नहीं था, फिर भी अपनी गांड को पूरी ताकत से भींचे अपने स्खलन को रोके हुए थी.

लज्जत से आंखे बंद थी ऐसा लग रहा था कि कोई तूफान गांड और चुत मे कैद है जो किसी भी कीमत पे आज़ाद होना चाहता है.

इधर बिल्ला रुखसाना कि गांड को चाट रहा था अपनी जीभ घुसाने कि कोशिश कर रहा था लेकिन रुखसाना पूरी ताकत से गांड भींचे आनंद कि चरम सीमा पे थी, कामवासना मे डूबा ऐसा बम थी जो कभी भी फट सकता था.परन्तु इस बम के फटने मे असीम आनंद था वो आनंद जो शारब का नशा भी देता

बिल्ला पूरी कोशिश करता है परन्तु सफल नहीं हो पाता वो अपना पूरा मुँह खोल के गांड के छेड़ के इर्द गिर्द कब्ज़ा कर लेता है जैसे खा ही जायेगा

रंगा ने भी बिल्ला को देखते हुई पूरी चुत मुँह मे भर ली और चुत के दाने को मुँह मे ले के जोर से दबा दिया....


आआआ हहहह ..... नहीं आआआ हहहहहह

किसी शेरनी कि गर्जना करती रुखसाना भरभरा के रंगा बिल्ला के मुँह मे झड़ने लगी....

फट फट .... फुर्रररररर कि आवाज़ के साथ गांड खुल गई और ढेर सारी शराब तेज़ प्रेशर के साथ सीधा बिल्ला के मुँह मे जाने लगी, और कुछ नीचे रिसती हुई चुत के रास्ते रंगा के मुँह मे जाने लगी.

रुखसार बैदम सी निढाल ही के आगे को पसर गई लेकिन बिल्ला ने गांड को सहारा दे के उसे ऊपर कि तरफ ही टांगे रखा

और गांड से निकली शराब पिने लगे.

एक भी बून्द जमीन मे नहीं गिरने दी,खूब चाट चाट के चूस चूस के जीभ गांड के अंदर डाल के, मुँह से खींच खींच के दोनों ने खूब शराब पी

शराब पिने ने ऐसा आनंद आज तक नहीं आया था....

जब पूरी शराब ख़त्म ही गई तो बिल्ला ने रुखसाना को छोड़ दिया.

रुखसाना किसी कटे पेड़ कि तरह ढह गई, लम्बी लम्बी सांसे खींचने लगी

ऐसा स्खलन उसे आज तक नहीं मिला था वो अंदर तक तृप्त हो चुकी थी.

अब रंगा बिल्ला शराब के नशे मे धुत रुखसाना को हाफ्ता देख रहे थे.... और जोर का ठाहका लगा रहे थे.

लंड अभी भी दोनों के बराबर खडे थे, आंखे हवस से भरी हुई थी...

रुखसाना समझ चुकी थी अब आगे क्या होना है



काली पहाड़ी से दूर मंदिर मे रूपवती अब सिर्फ ब्रा और पैंटी मे थी, तांत्रिक भी उसकीकाया देख के हैरान था

ऐसी स्त्री उसने भी आज तक नहीं देखि थी

रूप वती तांत्रिक के सामने घुटनो पे बैठ जाती है और अपनी एक ऊँगली मुँह मे डाल के कुछ देर चुस्ती है, ऐसे चुस्ती है जैसे कि लंड को और ऐसा करते हुए रूपवती कि नजर तांत्रिक के लिंग पे ही थी

अब वो अपनी ऊँगली को बाहर निकलती है उसपे लगे थूक को तांत्रिक कि तरफ दिखा कर अपने होंठ पे फेरने लगती है

रूपवती खुद नहीं जानती थी कि वो ऐसा कैसे कर ले रही है उसने तो कभी ऐसा देखा सुना ही नहीं था.

अपनी मनमोहनी अदाओ से रूपवती तांत्रिक को रिझा रही थी.

रूपवती अपने होंठो को गोल कर के ऊँगली अंदर बाहर करने लगी, थूक रिसते हुए ब्रा मे कैद स्तन पे गिर रहा था.

इतना थूक गिरा रही थी कि ब्रा गीली हो चली थी.

गिलापन तो नीचे पैंटी मे भी उत्पन्न होने लगा था, रूपवती हैरान थी कि ऐसे कैसे हो रहा है कभी भी इतनी वासना हावी नहीं हुई कि पैंटी गीली हो सके. बिना किसी मर्द के छुए चुत गीली कैसे हो रही है.

क्युकी ठाकुर साहेब के साथ तो सम्भोग ना के बराबर ही था,

वासना मे डूबी रूपवती आज कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी

रूपवती अपने काले घने बालो को खोल के लहरा देती है और दोनों हाथ सर के पीछे रख अपनी काली कांख(armpit) दिखाते हुए तांत्रिक कि आँखों मे देखती है...

वासना से भारी आँखों से देखते हुए रूपवती अपनी नाक कांख के करीब लाती है और एक गहरी सांस लेती है आज ये खुसबू उसे मदहोश कर रही थी, पसीने और इत्र कि मिली जुली खुसबू मंदिर के इस छोटे से गुफा नुमा कमरे मे फ़ैल जाती है.

ये खुसबू तांत्रिक कि नाक मे पहुँचती है, तांत्रिक हल्का सा विचलित होता है परन्तु इस विचलन को रूपवती भांप नहीं पाती और अपनी जीभ निकल के पता नहीं किस आवेश मे अपनी कांख चाटने लगती है

आज तक ये काम घृणाप्रद था परन्तु आज यही काम सुख प्रदान कर रहा था.

काम वासना मे औतप्रोत रूपवती पूरी जीभ निकाल के अपनी कांख ऊपर नीचे चाटने लगती है और एकटक तांत्रिक कि आँखों मे देखती रहती है.

ऐसा ही वो अपनी दूसरी कांख के साथ करती है दोनों ही कांख थूक से पुरे गीले हो चुके थे, जबान थी कि फिसले ही जा रही थी, रूपवती कि शरीर बेहद गरम होने पे आया था ऐसा लगता था जैसे रूपवती जल के खाक हो जाएगी...


अब ये गर्मी सहन से बाहर थी रूपवती अपनी एडियों के बल बैठ जाती है और पीछे हाथ ले जा के अपनी ब्रा का हुक खोल देती है


अब तांत्रिक भी बैचेन होने लगता है उसे कुछ देखना था, वो खजाना देखना था जो पर्दे के पीछे था.

टक.... कि आवाज़ के साथ ब्रा खुल के आगे को लटक जाती है परन्तु रूपवती उसे गिरने नहीं देती और एक हाथ से दोनों स्तन को ढक लेती है और एक हाथ सर के पीछे मदहोसी मे आंख बंद किये अपनी कांख को चाटने लगती है.

ऐसा शानदार नजारा तांत्रिक क्या उसके पूर्वज ने भी कभी नहीं देखा था.

तांत्रिक मन मे :- हे देवता ये स्त्री को समझ पाना भी कितना मुश्किल है, किसी ने सही कहाँ है जब कोई घरेलु औरत हवस, कामवासना पे उतर आये तो पत्थर तक़ पिघला दे.

रूपवती तांत्रिक कि आँखों मे देखती हुई धीरे धीरे अपने हाथ स्तन से हटा लेती है...

आअह्ह्ह.... क्या नजारा था मोटे मोटे सुडोल स्तन धम से तांत्रिक के सामने छलछला गये.

ये नजारा देखते ही तांत्रिक के लिंग ने एक जोरदार झटका मारा और वापस लटक गया.

इस बार लिंग कि ये हरकत रूपवती कि नजर मे आ गई थी.

वो समझ चुकी थी कि वो सही रास्ते पर है... उसे और आगे बढ़ना होगा उसकी मेहनत सफल हो रही है

अब रूपवती भी गरम थी हवस से भरपूर थी, वो अपने घुटने के बल हाथ आगे कर के चौपया हो जाती है, ऐसा करते ही उसके स्तन आगे को लटक जाते है जैसे कोई दुधारू कुतिया हो.


इसी स्थति मे रूपवती घुटनो के बल किसी कुतिया कि तरह जीभ अपने होंठों पे फेरती हुई  तांत्रिक कि और बढ़ चलती है और एक दम करीब पहुंच कर अपने दोनों स्तन ऊपर को उठा कर तांत्रिक को दिखाती है

और बारी बारी एक एक स्तन को हाथो से ऊपर नीचे हिला हिला के मादक अदा दिखाती है.

तांत्रिक ऐसा नजारा देख के दंग रह जाता है उसे लगता है वो अपना कण्ट्रोल खो देगा.

इधर रूपवती खुद हैरान थी कि वो ऐसा कैसे कर पा रही है, लेकिन इसमें एक मजा था, एक कसक थी

रूपवती खुद अपनी हरकत से उत्तेजित होती जा रही थी.

अँधेरी गुफानूमा कमरे मे दिये  कि मद्दम रौशनी मे आज कामवासना का खेल अपने चरम पे था.


उधर काली पहाड़ी रंगा बिल्ला के अड्डे पर भी नजारा कुछ कम नहीं था

मादकता चारो तरफ फैली थी शराब और चुत से निकले पानी कि खुसबू कमरे मे फ़ैल गई थी

हाफ़ती हुई रुखसाना को देख के रंगा मुस्कुराता है और उसके मुँह पे जा के बैठ जाता है.

रंगा:- चल रांड गांड चाट मेरी, ऐसा कह के अपनी गली गांड रुखसाना के होंठो पे रख देता है और उसके टट्टे रुखसाना कि नाक मे घुसे जाते है और लंड माथे पर टक्कर देता है

रुखसाना जो अभी अभी बुरी तरह झड़ी थी वो रंगा के लंड और गांड कि खुसबू पा के फिर उत्तेजित होने लगती है.

उसकी खास बात ही यही थी कि वो चुदाई से कभी थकती नहीं थी.

तुरंत अपनी जीभ निकल के रंगा कि गांड के छेद को कुरेदने लगती है बड़ा कसैला स्वाद था परन्तु उसे वो पसंद था.

इधर बिल्ला चिकेन खाने और दारू पिने मे बिजी था और किसी भैसे कि तरह पड़ा हुआ रंगा कि गांड चटाई देख रहा था.

अब रुखसाना ने अपनी जीभ तिकोनी के रंगा कि गांड मे घुसाने कि कोशिश कि.

रंगा :- वाह रांड वाह तेरा कोई जवाब नहीं चाटने मे भी उस्ताद और चाटवाने मे भी उस्ताद.

रुखसाना :- मालिक सब आप कि ही कृपा है, अपने ही जगाया है मेरे अंदर कि रांड को

रंगा का लंड उत्तेजना मे पत्थर कि तरह कड़क हो जाता है और उछाल उछाल के रुखसाना के माथे पे चोट करने लगता है.

अब रुखसाना रंगा के टट्टे मुँह मे भर के चूस राही थी.


बिल्ला :- रांड मेरा भी चूस ले, या आज रंगा को ही पीयेगी. हाहाहाहाहा

इतना बोल के जमीन पे लेती रुखसाना के मुँह के पास आ के बैठ जाता है और अपने लंड कि चोट उसके गालो पे करने लगता.

रंगा अपना लंड रुखसाना के मुँह मे ठूस देता है बिल्ला भी कहाँ पीछे रहने वाला था


बिल्ला :- ले रांड मेरा लंड भी ले मुँह मे

अब रुखसाना के लिए एक लंड लेना ही मुश्किल था दो दो कैसे घुसाती मुँह मे, फिर भी कोशिश करती है और दोनों लंडो को पकड़ के एक साथ चाटने लगती है

रंगा एक हाथ पीछे ले जा के चुत के दाने से खेलने लगता है.

उत्तेजना और लज्जत कि वजह से रुखसाना हद से ज्यादा मुँह खोलती है और एक साथ दोनों लंड को अंदर ले लेती है.

अब हालात ये थे कि रंगा अपना लंड थोड़ा बाहर निकलता तो बिल्ला अपना भारी लंड गले टक ठूस देता, फिर बिल्ला लंड बाहर खींचता तो रंगा अपना भयंकर लंड जड़ तक़ थोक देता.


कमरे मे गु गु गुमममम फच फच कि आवाज़ गूंज रही थी. रुखसाना के मुँह से ढेर सारा थूक निकल निकल के फर्श पे गिरता जा रहा था.


रंगा लगातार रुखसाना कि चुत पे हाथ चलाये जा रहा था दोनों ही कोई रहम दिखाने के मूड मे नहीं थे

तीनो ही परम आनद कि चरम सीमा पे थे.

करीबन आधे घंटे हो गये थे  मुख चुदाई को अब रंगा बिल्ला झड़ने वाले थे.

धप घप घप.... आअह्ह्ह आअह्ह्ह

हुंकार भरते हुए रंगा बिल्ला स्खालित होने लगे, मारे उत्तेजना के दोनों ने एक साथ ही अपना लंड रुखसाना के गले मे झाड तक़ ठूस दिया दोनों के टट्टे बुरी तरह रुखसाना के चेहरे पे दब गये थे.


भल भला के दोनों का वीर्य रुखसाना के गले और मुँह मे भरने लगा... एक मिनट तक़ दोनों ही अपने टट्टो को खाली करते रहे.

पूरी तरह खाली होने के बाद दोनों रुखसाना के अजूबाजू ढह जाते है.

रुखसाना खासती घरघारती बेचैनी से पेट के बल पलट जाती है, उसकी सांसे किसी धोकनी कि तरह चल रही थी सारा वीर्य उसके पेट मे जा चूका था एक बून्द भी व्यर्थ नहीं गया था.

रुखसाना तो वीर्य पी चुकी थी.

क्या रूपवती भी वीर्य पी पायेगी?

बने रहिये.....

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कालीपहाड़ी के मंदिर मे

रूपवती तांत्रिक के सामने अपने स्तन को हिला हिला के रिझा रही थी आज वजन कुछ ज्यादा ही बड़ गया था उसके सतनो का

निप्पल बिल्कुल टाइट हो के खड़े थेजिन्हे रूपवती ऊँगली और अंगूठे मे पकड़ के कुरेद रही थी.

रूपवती अपने दाएं स्तन को उठा के अपने मुँह के पास लाती है और जीभ बाहर निकल के निप्पल पे रख देती है, ऐसा करते ही लज्जत हवस से उसकी आंखे बंद हो जाती है.

एक सुकून था जो कि आज तक़ कहाँ छुपा था पता नहीं, रूपवती आंखे बंद कर निप्पल को चाटती है और उसकी मुँह से आह आआह निकल जाती है.

इस आह मे एक आह और शामिल थी जो तांत्रिक के मुँह से निकलती है ऐसा नजारा देख आहहहह फुट ही पड़ती है.

परन्तु तांत्रिक कि आह, रूपवती के हवस भारी गुरराहट मे दबा जाती है

रूपवती कहाँ थी किसके सामने थी उसे कुछ नहीं पता था उसे बस अपने शरीर से खेलने मे आनंद प्राप्त हो रहा था वो इस खेल को पूरा खेल लेना चाहती थी.

इसी चाहत मे वो अपना बाया स्तन पकड़ के अपने मुँह मे लगा देती है और निप्पल को अपने दांतो तले चबाने लगती है.

ऐसा लगता था जैसे उसमे दूध बह रहा हो और वो एक एक बून्द चूस लेना चाहती हो.

अपनी जबान से लगातार बारी बारी दोनों निप्पल्स को कुरैदे जा रही थी... आज एक अलग ही भूख जग गई थी रूपवती के तन बदन मे.

इस गर्मी और हवस से तांत्रिक का बचे  रह पाना भी नामुमकिन था.

रूपवती बदहवास सी तांत्रिक के लटके लंड के बिल्कुल गरीब पहुंच जाती है और अपनी लम्बी काली जबान निकाल के लंड को बिना टच किये ही सुड़प सुड़प जीभ चलाने लगती है जैसे कि कोई कुतिया लंड चाट रही हो.

कुतिया बनी रूपवती अपनी मोटी काली गांड पीछे कि और पूरी तरह उठा लेती है, और मुँह पूरा नीचे कर के लपड़ लपड़ जीभ चला रही थी जिस वजह से गांड धलक धलक हिल रही थी.

ये नजारा देख के तांत्रिक उलजुलूल के मुँह से काम भारी सिसक निकल ही जाती है आआहहहहह... और लंड झटके खा के उठने लगता है, परन्तु जैसे ही लंड रूपवती को छूने को होता है वह पीछे हट जाती है,

तांत्रिक मन मसोस के रह जाता है, रूपवती के पीछे हटने से उसकी गांड बहुत जोर से हिलती है, तांत्रिक कि नजर पूरी तरह रूपवती कि गाण्ड पर टीक जाती है.

अब रूपवती समझ चुकी थी कि उसकी गांड तांत्रिक को आकर्षित कर ही है

अब वो और हौसले के साथ अपनी काम क्रिया को अंजाम देने का इरादा कर लेती है.

इसी फिराक मे रूपवती एक दम पीछे को पलट जाती है.

अपनी मोटी बड़ी काली गांड छलकाती हुई तांत्रिक के सामने प्रस्तुत कर देती है, ये नजारा देखते ही तो तांत्रिक कि आंखे फटी कि फटी रह जाती है.

तांत्रिक :- हे देवता ये क्या नजारा दिखाया तूने, आअह्ह्ह..... मेरा लंड क्या हो रहा है इसे.

आआहहहहह

आवाज़ सुंन के गांड हिलाती  रूपवती बड़ी अदा मदहोशि  के साथ गर्दन पीछे घुमाती है

पीछे का नजारा देख रूपवती आश्चर्य से बोखला जाती है. हे भगवान इतना बड़ा लंड ये नजारा देख के रूपवती कि चुत पानी छोड़ने लगती है पूरी पैंटी गीली हो चुकी थी जैसे किसी ने तेल मे भिगो दी हो.

पीछे का नजारा था ही कुछ ऐसा तांत्रिक का 12इंच 5इंच मोटा लंड जाग्रत अवस्था मे आ चूका था, इतना भयानक काला लिंग देख के किसी भी औरत के होश उड़ जाते.

तांत्रिक :- आअह्ह्हह्ह्ह्ह..... रूपवती ये क्या किया तूने आज पुरे 10 साल बाद मेरा लिंग खड़ा हुआ है.

आअहहा..... लिंग बिल्कुल सीधा खड़ा हो चूका था.

रूपवती जानती थी अब मंजिल दूर नहीं है, लेकिन मुश्किल भी यही था कि बिना हाँथ लगाए वीर्य निकालना.

रूपवती तांत्रिक के सामने घोड़ी बनी हुई थी अपनी गांड उठाये मादक अवस्था मे. कामवासना मे गिरफ्तार थी आज.

रूपवती दोनों हाथ पीछे ले जाती है और दोनों अंगूठे पैंटी के दोनों तरफ फसा के नीचे करने लगती है.

ऐसा करते हुए कमरे मे सिसकारिया गूंज उठती है एक तांत्रिक कि थी जो ये नजारा देखने के लिए मरा जा रहा था और दूसरी आवाज़ खुद रूपवती कि थी जो पीछे गर्दन घुमाये तांत्रिक कि आँखों मे एकटक देखे जा रही थी

अब रूपवती अपनी पैंटी आधी गांड तक़ नीचे कर चुकी थी, गांड के बीच कि दरार दिखने लगी थी, ऐसा लगता था जैसे दो काली पहाड़ियों के बीच एक पतली पगडंडी है यदि कोई इसपे चलने कि कोशिश करता तो जरूर फिसल जाता.

तांत्रिक का लंड लगातार हवा मे झटके मार रहा था

रूपवती पीछे देखती हुई एक दम से अपनी पैंटी पूरी नीचे खिसका देती है....

आआहहहह.... आअह्ह्ह.... सिसकारी भरती   रूपवती आंखे बंद कर लेती है, मदहोशी इस कदर सर पे सवार थी कि गांड किसी भट्टी कि तरह जल रही थी, चुत से पानी ऐसे रिस रहा था जैसे बरसो कि बारिश के बाद कोई झरना बह रहा हो.

धम से करती हुई गांड आज़ाद हो चुकी थी, गांड के दोनों पाट अलग हो चुके थे, दोनों ही हिस्से अलग अलग दिशा मे जाते तो कभी वापस आ के एक दूसरे को टक्कर जड़ देते..इस टकराहट मे बीच कि काली  पगडंडी दिख रही थी इस पगडंडी मे एक काला कुआँ था, कुएं के नीचे चुत रूपी झरना था जो पता नहीं आज कितने बरसो के बाद भलभला के बह रहा था.

चुत से रिसता पानी जांघो को भीगा रहा था, अंधेर मध्यम रौशनी मे रूपवती कि काली मोटी चिकनी गांड चमक रही थी.


तांत्रिक इस चिकनाहट पे पक्का फिसलने वाला था.

ये नजारा देख के एक बार तो तांत्रिक अपने लोडे के साथ ही अपने सिंघाहसन पे उछल पड़ा.

तांत्रिक :- रूपवती ये क्या नजारा दिखा दिया तूने आहाहाहा..... मजा आ गया.

आज तांत्रिक को भी कामवासना ने घेर लिया था, उसके मन मे भी कही ना कही सम्भोग कि लालसा जन्म ले रही थी नजारा ही कुछ ऐसा था.

परन्तु वो सम्भोग नहीं कर सकता था,वो अपने वचन से बंधा हुआ था वो सिर्फ वीर्यरुपी आशीर्वाद ही दे सकता था.

रूपवती अपने दोनों हाथो को पीछे ले जा के अपनी गांड के दोनों हिस्सों को अलग करती है और वापस छोड़ देती है, गांड के हिलने से रूपवती का पूरा बदन हिला जाता है.

ऐसा ही रूपवती दो तीन बार करती है फिर अपनी लार टपकाती चुत पे हाथ रख के मसल देती है और खुद ही चीख पड़ती है....

आअह्ह्ह्ह...... मममममम... हे भगवान

चुत और ज्यादा पानी छोड़ने लगती है, पूरी हथेली गीली हो जाती है.

रूपवती अपने हाथ को अपनी नाक के करीब ला के देखने लगती है उसने आज तक़ इतना पानी नहीं छोड़ा था.

अपनी चुत से निकले पानी को सुघती है... आहहहह क्या खुशबू है ये गंध उसे अंदर तक़ आनंदित कर देती है

रूपवती मदहोशी मे अपना पूरा मुँह खोल के अपना हाथ चाटने लगती है, चाट चाट के हाथ साफ कर देती है फिर वापस तांत्रिक कि आँखों मे देखती हुई अपनी गांड का छेद को ऊँगली से कुरेदने लगती है.. ऐसा मजा उसे आजतक कभी आया नहीं था, आज जिस सुख से वो परिचित हुई वो हैरान थी कि आज तक़ ऐसे सुख से कैसे वंचित रही.

तांत्रिक भी ऐसे नज़ारे को देख कर दंग था, ऐसी काया ऐसा मदहोश बदन, ऐसी गांड आज तक नहीं देखि थी.

लगता था अब टिक पाना मुश्किल है.

काम मे डूबी रूपवती अपनी चुत से निकले पानी को हाथ मे ले ले के अपने गांड पे मलते जा रही थी जैसे किसी तेल से गांड कि मालिश कर रही हो.

गांड चुत जाँघ सब कुछ चुत के पानी से भर चूका था, हलकी रौशनी मे चमक बिखेर रही थी रूपवती कि चिकनी काली चुत और गाण्ड, रूपवती इतनी गरम हो चुकी थी कि वो कभी भी झड सकती थी, परन्तु खुद के स्सखलित होने से पहले उसे तांत्रिक को स्सखालित करना था.

वो अपने चरम पे थी, एक ऊँगली अपने मुँह मे ले के थूक से अच्छे से गीली करती है और ऊँगली को गांड के छेद पे फिराने लगती है... पहले ही चुत के पानी से चिकने गुदा द्वारा मे ऊँगली पोक करती हुई एक दम से अंदर चली जाती है रूपवती कि जोरदार सिसकारी गूंज जाती है. आअह्ह्ह.... आहहहह....

तांत्रिक का लिंग भी एक तगड़ा झटका लेता है और झड़ने के करीब ही था कि खुद को रोक लेता है और लम्बी सांस लेते हुए रूपवती को अपने गुदाद्वारा से खेलता देख मुस्कुरा देता है.

ये देख के रूपवती एक बार को हिम्मत हारती हुई लगती है, क्युकी वो तांत्रिक से पहले स्सखालित हो गई तो फिर वो कैसे वीर्य ग्रहण कर पायेगी?

लेकिन हवस अपनी परकाष्ठा पे थी, रूपवती को लगने लगा कि कही उसके प्राण ही ना निकल जाये... खुद के स्सखलन को रोकना था.

उसे हवन कुंड के पास एक गोल लकड़ी पड़ी दिखाई देती है जो कि करीबन 5 इंच लम्बी होंगी.

आव देखा ना ताव रूपवती उस लकड़ी को उठा के सीधा अपनी गांड मे पूरा जड़ तक घुसा देती है,आआहहहहह.... अह्ह्ह्हह.... एक जोरदारचीख गूंज उठती है इस चीख मे दर्द के साथ हवस भी समाई हुई थी,

लकड़ी पूरी जड़ तक घुस चुकी थी रूपवती कि टाइट गांड मे.

तभी उसकी गांड के छेद पर बहुत ही तेज़ प्रेशर से कोई गीली चिपचिपी चीज टकराती है,

अचानक हुए हमले से रूपवती पलट के देखती है तो तांत्रिक चिंघाड़ रहा था.

तांत्रिक :- आअह्ह्हह्ह्ह्ह रूपवती मेरा वीर्य मेरा आशीर्वाद ग्रहण कर.

पचाक पाचक..... पिच पिच....

करती वीर्य कि मोटी गाढ़ी धार रूपवती कि गांड चुत जाँघ को नहलाती चली गई, वीर्य गांड से होता हुआ कमर के रास्ते स्तन तक पहुंचने लगा क्युकी रूपवती कि गांड ऊपर और धड नीचे था.

रूपवती पूरी तरह वीर्य मे सन चुकी थी, लकड़ी का टुकड़ा अभी भी गांड मे ही फसा हुआ था वो चौपया बनी हुई ही अपना मुँह तांत्रिक कि तरफ घुमा लेती है परन्तु अब तांत्रिक का लिंग थोड़ा नीचे आ के लिंग के नीचे कटोरे को भरने लगता है.

आह्हः... आह्हः. रूपवती

ऐसा कह कर कटोरा एक के बाद एक निकलती वीर्य कि पिचकारियों से भरने लगता है.

रूपवती हैरान थी कि इतना वीर्य कैसे निकल सकता है.

1ltr का कटोरा पूरा भर चूका था, आखिर 10 साल से जमा किया हुआ वीर्य आज निकला था.

रूपवती पूरी वीर्य से सनी हुई कुतिया कि तरह बैठी निकलते वीर्य को देख रही थी.....

तांत्रिक का स्सखालन बंद हो चूका था, वह पूरी तरह होश मे था परन्तु थकान का कोई नामोनिशान नहीं था उसके चेहरे पे.

रूपवती मन मे :- कैसा पुरुष है ये कि इतना वीर्य निकलने के बाद भी थकान नहीं है अभी भी स्थिर बैठा है.

तांत्रिक :-वाह रूपवती तुम वाकई कमाल कि स्त्री निकली जो काम कोई नहीं कर पाया वो आज तुमने कर दिखाया.

मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है लो वीर्य ग्रहण करो, ऐसा बोल के वीर्य से भरा कटोरा रूपवती कि तरफ बढ़ा दिया..

रूपवती अभी भी अपनी हवस कि खुमारी से बाहर नहीं आई थी, वो शांत होना चाहती थी, स्सखालित होना चाहती थी लेकिन तांत्रिक अपना वीर्य निकाल चूका था

वो तुरंत उठ बैठी है और तांत्रिक के हाथ से कटोरा ले के अपने होंठो से लगा लिया और गटागट पिने लगी.... गुलुप गुलुप कर के गाढ़ा वीर्य उसके हलक से नीचे उतरने लगा,

जैसे जैसे वीर्य पीती गई उसकी कामवासना ठंडी होती गई उसकी गर्मी ठंडाई मे बदलने लगी बिना स्सखालित हुए ही.

आहहहह..... क्या स्वाद था वीर्य का बिल्कुल अनोखा. बचे खुचे वीर्य को रूपवती कटोरे मे जीभ डाल डाल के साफ कर दिया.

अब रूपवती पूरी तरह शांत हो चुकी थी, चुत का झरना बहना बंद हो चूका था जैसे तूफान के बाद शांति छा जाती है वैसे ही शांति छा गई थी कमरे मे.

तांत्रिक :- शाबाश रूपवती तुम मेरी परीक्षा मे पास हो गई, अब तुम्हे वाकई रूपवती होने से कोई नहीं रह सकता.

रूपवती :- कैसी परीक्षा बाबा, रूपवती वीर्य मे भीगी नंगी ही तांत्रिक के सामने हाथ जोड़े बैठी थी उसे अपार शांति का अनुभव हो रहा था..

तांत्रिक :- मै देखना चाहता था किं तुम उस इच्छाधारी नाग को अपने साथ सहवास करने के लिए मजबूर भी कर पाओगी या नहीं.

परन्तु जिस स्त्री ने मेरा वीर्य बिना हाथ लगाए स्सखालित करवा दिया वो स्त्री क्या नहीं कर सकती. शाबाश रूपवती

जाओ मंदिर के पीछे जलाशय मे खुद को साफ कर लो फिर बताता हूँ कि कैसे वो इच्छाधारी नाग तुम्हे मिलेगा?


रूपवती हाथ जोड़े नंगी ही अपनी मोटी काली भारीभरकम गांड मटकाती हुई कमरे से बाहर मंदिर के पीछे निकल पड़ती है.

अब उसकी चाल मे तब्दीली आ गई थी क्युकी अभी भी उसकी गांड मे लकड़ी का टुकड़ा फसा हुआ था.


उधर रंगा बिल्ला के अड्डे पर

रुखसाना जमीन पे पेट के बल लेटी हुई हांफ रही थी और आजु बाजू गिरे रंगा बिल्ला उसकी हालत देख के ठहाके लगा रहे थे.

रंगा :- क्यों रांड कैसा लगा?

रुखसना :- हाफ़ती हुई मालिक आप लोगो ने तो मेरी जान ही निकाल दी थी.

बिल्ला पास बैठे रुखसाना कि गोरी मखमली गुदगुदी गांड को घूरे जा रहा था....रुखसाना के हाफने कि वजह से गांड ऊपर नीचे हो रही थी, गांड का छेद खुल बंद हो रहा था.

ऐसा नजारा देख के बिल्ला फिर से जोश मे आ जाता है और तुरंत उठ के रुखसाना कि गांड दबोच लेता है रुखसाना कुछ समझ पाती उस से पहले ही बिल्ला अपने खुटे जैसे लंड जो कि वीर्य और रुखसाना के थूक से चमक रहा था  रुखसाना कि गांड मे  जड़ तक ठूस चूका था

आअह्ह्हह्ह्ह्ह.... आहहहह. कि जोरदार के साथ रुखसाना अपनी गर्दन और सर उठा के चीख पड़ती है.

माल्ललिक ... आआआ  हहहहहह .....

जैसे कोई भेड़िया हुंकार भर रहा हो.


बिल्ला को कोई फर्क नहीं पड़ता वो धचा धच धचा धच गांड चोदे जा रहा था.

पूरा बाहर निकाल के एक ही बार मे जड़ तक पंहुचा दे रहा था. रुखसाना हवस से भरी बेहाल थी और कुतिया बनी सिसकारी मार रही थी.....

रुखसाना :- आहहहह.... मालिक आअह्ह्ह... धीरे मालिक धीरे

बिल्ला :- चुप रंडी.... ले धचा धच धचा धच..... फच फच फच

अब ऐसा खूबसूरत नजारा देख के रंगा कैसे पीछे रहता वो भी खड़ा हो के लंड मसलता  हुआ रुखसाना के पीछे आ गया.

और अपना लंड रुखसाना कि गांड पे टच करने लगा..

रुखसाना रंगा के इरादे भाम्प जाती है, कहाँ बिल्ला का लंड ही भारी पड़ रहा था ये रंगा भी आ गया.

रुखसाना :- नहीं मालिक गांड मे नहीं, आप चुत मे डाल लीजिये जैसा हमेशा करते है.

अक्सर रंगा बिल्ला चुत गांड मे ही एक एक कर के लंड डाल के चोदा करते थे. परन्तु आज इनाम देना था रुखसाना को.

बिल्ला :-चुप छिनाल और ऐसा बोल के तडातड़ गांड मारने लगता है और एक पैर से रुखसाना के सर को दबा के गांड ऊपर कि तरफ पकड़े दबादब चोदे जा रहा था.

रुखसाना तो पहले ही गरम थी अब तो उसकी वासना चरम पे पहुंच गई थी उसकी चुत लगातार पानी छोड़े जा रही थी, बिल्ला के हर धक्के के साथ चुत का रस किसी फव्वारे कि तरह चुत से निकल निकल के जमीन भीगाने लगा..

रंगा और इंतज़ार नहीं कर सकता था वो भी पीछे आता है और एक ही धक्के मे बिल्ला के साथ अपना लंड भी पूरा जड़ तक रुखसाना कि गांड मे डाल देता है.

सच मायनो मे आज रुखसाना कि गांड फटी थी.

रंगा बिल्ला एक साथ लंड बाहर निकलते फिर एक साथ जड़ तक पेल देते, बिल्ला ने रुखसाना कि गर्दन दबाई हुई थी बस उसके मुँह से रह रह के मालिक आअह्ह्ह मालिक आह्हः धीरे मालिक.... Aaaa अह्ह्हभ धीरे ही निकल पा रहा था.

धकाधक चोदते हुए 15 मिनट हो चुके थे अब रुकसाना कि गांड भी उनके लंड पे एडजस्ट हो चुकी थी अब रुखसना मजे मे थी ऐसा मजा ऐसा आंनद आज तक नहीं मिला था.

दर्द के बाद ही असली मजा है.... अब रुखसना भी अपनी गांड पीछे दोनों के लोडो पे पटक पटक के चुद रही थी

आह्हः.... मालिक फाड़ो अपनी रंडी कि गांड, और मारो और अंदर,, फाड़ के बिखेर दो मेरी गांड आअह्ह्ह.....

रंगा बिल्ला :- ले रंडी ले छिनाल चुद, चुद अपने मालिकों से


धचाधच फका फ़क.... फच फच के साथ और आधे घंटे पेलते रहे, वासना अपने चरम पे थी.

एक जबरजस्त हुंकार गूंज उठी, इसी हुंकार के साथ रंगा बिल्ला एक साथ अपनी पिचकारी छोड़ने लगे.


आहहहह.... पीच पीच..... पीच लगातार पिचकारी छूटती गई और रुखसाना कि गांड भरती गई.

रुखसाना भी अति उत्तेजना मे वीर्य कि गर्मी पा के भरभरा के झड़ने लगी

आअह्ह्ह... मालिक पचच्चाक पचच्चाक.... करके चुत भलभालने लगी.

अब तीनो ही ढेर हो चुके थे रंगा बिल्ला के लंड गांड से बाहर आ चुके थे.

रुखसाना अपनी  गांड भींच के वीर्य को बाहर गिरने से रोकती है, और जोर से गांड भींच लेती है.

अब सुबह हो चली थी.... वासना और हवस भरी रात बीत चुकी थी.

धमाकेदार चुदाई के बाद रंगा बिल्ला गहरी नींद मे जा चुके थे, और रुखसाना मुस्कराती हुई रंगा बिल्ला को देखती है और गांड भिचे ही अपने कपडे पहन लेती है. वीर्य अभी भी रुखसाना के गांड मे ही कैद था.

उधर मंदिर ने रूपवती खुद को साफ कर के वापस तांत्रिक के सामने हाथ जोड़े बैठी थी, वो अब कपडे पहन चुकी थी.

तांत्रिक :- सुनो रूपवती तुम्हे वो इच्छाधारी नाग "विषरूप" गांव मे मिलेगा जहाँ कभी इच्छाधारी साँपो कि बस्ती थी.

उस इच्छाधारी सांप के पास एक मणि  है जिसे तुम्हे प्राप्त करना होगा, मै तुम्हे मन्त्र दूंगा वो मन्त्र, मणि हाथ मे ले के उस इच्छाधारी सांप के सामने बोलोगी तो वो आंशिक रूप से तुम्हारे काबू मे होगा, फिर उसके बाद तुम्हे पता ही है क्या करना है.

तथास्तु

ऐसा कह के तांत्रिक उलजुलूल वापस ध्यान मे चला गया.

अब सुबह हो चुकी थी

रूपवती के मन मे बहुत सी उम्मीदें जग चुकी थी अतिसुंदरी होने कि, ठाकुर ज़ालिम सिंह से बदला लेने कि.

इन्ही उम्मीदो  को सजाये रूपवती मंदिर से बाहर निकल जाती है.

उसका घोड़ा वीरा बाहर ही बघघी से बंधा हुआ था. वीरा रूपवती का वफादार घोड़ा था.

रूपवती तुरंत बघघी मे बैठ अपनी हवेली निकल पड़ती है, उसकी गांड मे अभी भी लकड़ी का टुकड़ा फंसा हुआ था जो कि रह रह के गुदगुदी मचा रहा था, वासना कि टिस उठ रही थी आज रूपवती मे काफ़ी परिवर्तन आ चुके थे.

उधर रुखसाना भी अपना चेहरा ढके हुए अपनी गांड मे रंगा बिल्ला का वीर्य लिए निकल चुकी थी.

रास्ते मे रूपवती और रुखसाना एक दूसरे को क्रॉस करते है लेकिन कोई किसी का चेहरा नहीं देख पाता.


ये रुखसाना अपनी गांड मे रंगा बिल्ला का वीर्य क्यों दबाई हुई है?

और अब रूपवती कि जिंदगी मे क्या परिवर्तन आएंगे?

मंगलवार का दिन भी नजदीक था.

क्या ठाकुर कामवती से शादी कर पाएंगे?

बने रहिये इस कालजायी सफर मे अपने दोस्त andy के साथ.

Contd....

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