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मेरी माँ कामिनी -31

मेरी माँ कामिनी - भाग 31

माहौल में अब सिर्फ़ मटन पकने की खुशबू नहीं थी, बल्कि दो जिस्मों के जलने की गंध भी थी।
आग की लपटें नाच रही थीं।
कादर का हाथ भगोने में मटन चला रहा था, लेकिन उसकी आँखें कामिनी की "खुली हुई घाटी" में भटक रही थीं।
उस सफ़ेद, महीन दुपट्टे के नीचे... उसका औज़ार अब पूरी तरह जाग चुका था।

वह दुपट्टे को तंबू की तरह आगे धकेल रहा था।
कपड़ा इतना पतला था कि उसके नीचे कादर के लिंग का काला तना और आगे का वह लाल टोप एक धुंधली परछाई की तरह साफ़ दिख रहा था। वह रह-रहकर फड़क रहा था, जैसे बाहर आने के लिए बेताब हो।

"म... मटन पकने वाला है मैडम," कादर की आवाज़ भारी और फटी हुई थी। उसका गला सूख रहा था।
उसने भगोने से कलछी बाहर निकाली।
उसमें गाढ़ा, रसीला शोरबा (Gravy) और एक मांस का टुकड़ा था।
कादर ने अपनी हथेली पर थोड़ा सा शोरबा गिराया।
वह गरम था, लेकिन कादर को महसूस ही नहीं हुआ।
उसने अपना हाथ धीरे से कामिनी के चेहरे की तरफ बढ़ाया।

उसकी उंगलियां शोरबे में सनी हुई थीं।
"चखिये..." कादर ने कामिनी की आँखों में झांका। "देखिये, नमक बराबर है या नहीं?"

कामिनी की नज़रें कादर के लंड के उभार से फिसलकर उसकी उंगलियों पर आईं।
उन खुरदरे, बड़े और मर्दाने हाथों पर लगा वो लाल शोरबा।
कामिनी धीरे से आगे झुकी।
उसके झुकते ही उसका ब्लाउज़ और ढीला हो गया, और उसके स्तनों का मांसल उभार कादर की आँखों के बिल्कुल सामने आ गया।
कामिनी ने अपने होंठ खोले।
उसने कादर की तर्जनी (Index Finger) को अपने मुंह में लिया।
"स्स्स्लर्प..."
कामिनी ने कादर की उंगली को अपनी जीभ से चाटा।
वह शोरबा तीखा और नमकीन था... लेकिन उसमें कादर के पसीने और उसकी मर्दानगी का स्वाद भी मिला हुआ था।
कामिनी ने उसकी उंगली को अपने होंठों के बीच दबाया और धीरे से चूसा।
कादर के बदन में एक बिजली दौड़ गई।

"आह्ह्ह..." कादर के मुंह से सिसकी निकल गई।
उसे लगा जैसे कामिनी उसकी उंगली नहीं, बल्कि उसका लंड चूस रही हो।
कामिनी ने उंगली मुंह से निकाली। उसकी जीभ पर अभी भी सालन लगा था।
"बहुत... बहुत स्वादिष्ट है," कामिनी ने कादर की आँखों में देखते हुए कहा। उसका इशारा मटन की तरफ कम और कादर की तरफ ज्यादा था।
"नमक तो ठीक है... लेकिन..."
कामिनी की नज़रें नीचे झुकीं।
सीधे कादर की कमर पर।
वहाँ उस सफ़ेद दुपट्टे के नीचे... वह 'दानव' अब बेकाबू हो रहा था। वह दुपट्टे को फाड़कर बाहर आने को तैयार था।
*************************

आग की लपटें नाच रही थीं, और उनके बीच कामिनी कादर की उंगली को अपने मुंह में भरे हुए थी।
उसकी जीभ कादर की पोरों पर लगे सालन को चाट रही थी, लेकिन उसकी आँखों में जो भूख थी, वह मटन के लिए नहीं थी।
वह उसकी उंगली को चूसते हुए उसे ऐसे घूर रही थी, जैसे कह रही हो 'मुझे उंगली नहीं, वो चाहिए जो नीचे लटक रहा है।'

कादर, जो अब तक थोड़ा झिझक रहा था, कामिनी का यह रूप देखकर समझ गया।
वह एक माहिर खिलाड़ी था। उसने औरतों की आँखों में हवस पढ़ी थी, लेकिन कामिनी की आँखों में तो समर्पण था।
कादर ने अपनी उंगली कामिनी के गीले और गरम मुंह से बाहर निकाली।
एक लिसलिसी लार की तार उसकी उंगली और कामिनी के होंठों के बीच खिंच गई।

"मसाला तो आपने चख लिया मैडम..." कादर की आवाज़ अब भारी और फटी हुई थी, जैसे कोई जानवर गुर्रा रहा हो।
"लेकिन असली स्वाद अभी बाकी है। रुकिए, आपको और स्वादिष्ट सूप चखाता हूँ।"

कादर अपनी जगह से हल्का सा ऊपर उठा।
उसने एक झटके में अपनी कमर पर बंधे उस सफ़ेद दुपट्टे की गांठ को खींच दिया।
"सर्रररर......"
रेशमी दुपट्टा उसकी कमर से फिसलकर नीचे चटाई पर जा गिरा।
और फिर... धमाका।
कादर का विशाल, काला और पूरी तरह से खड़ा 10 इंच का लंड स्प्रिंग की तरह उछलकर कामिनी के चेहरे के बिल्कुल सामने आ गया।

वह हवा में ऐसे लहराया जैसे कोई कोबरा फन फैलाकर खड़ा हो गया हो।
कामिनी की आँखें फटी की फटी रह गईं।
कल रात और अभी थोड़ी देर पहले जो दिखा था, वह 'झांकी' थी। यह 'विश्वरूप' था।

वह लंड रघु के औज़ार से भी कहीं ज्यादा मोटा और लंबा था।
उसका तना (Shaft) लोहे की रॉड जैसा सख्त था, जिस पर मोटी-मोटी नसें तनी हुई थीं।
और उसका आगे का हिस्सा...
खतने की वजह से उसका विशाल, लाल और मशरूम जैसा सुपाड़ा (Glans) पूरी तरह नंगा था। वह इतना चौड़ा था कि कामिनी सोचने लगी कि यह मेरे मुंह में समाएगा भी या नहीं।

कामिनी अभी उस विशालता को देखकर सम्मोहन में थी ही कि कादर ने कुछ ऐसा किया जिसने उसे हिला कर रख दिया।
कादर ने भगोने से कलछी उठाई।
उसमें से भाप निकल रही थी। गरम, मसालेदार और लाल तरी (Gravy) कलछी में भरी हुई थी।

कादर ने कामिनी की आँखों में देखा और मुस्कुराया।
और अगले ही पल...
उसने वह खौलता हुआ मसालेदार सूप अपने खड़े और नंगे लंड पर उंडेल दिया।
"छनन्नन्न......!!"
गरम तेल और मसालों की धार सीधे उसके नंगे लाल सुपाड़े पर गिरी और वहां से फिसलकर उसके नसों भरे तने और अंडकोषों पर बहने लगी।

सूप गरम था, बहुत गरम।
आम इंसान चीख पड़ता।
लेकिन कादर? कादर ने उफ़ तक नहीं की।
उल्टा, उस जलन और गर्मी ने उसके लंड को और भी ज्यादा पत्थर जैसा सख्त कर दिया।

लाल तरी (Gravy) उसके काले लंड पर बह रही थी, जिससे वह और भी ज्यादा चमकदार, रसीला और खतरनाक लग रहा था। तेल की बूंदें उस लाल टोप से टपक रही थीं।
कादर ने अपनी कमर को एक झटका दिया और अपने उस 'सूप से नहाए हुए' लंड को कामिनी के होंठों से इंच भर की दूरी पर ले आया।

उससे मटन, मसालों और कादर के पौरुष की मिली-जुली महक आ रही थी।
"अब चख के बताइये मैडम..." कादर ने चुनौती दी। "मसाला ठीक है? नमक ज्यादा तो नहीं?"

कामिनी पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। उसने ऐसा अहसास, ऐसे सख्त मर्द की कल्पना भी नहीं की थी.
उसकी योनि से इतना पानी बह रहा था कि वह चटाई पर फिसल रही थी।
उसके सामने एक गरम, मसालेदार और मांसल लॉलीपॉप था। 20240511-213750
वह खुद को रोक नहीं पाई।
उसने अपने खूबसूरत, लाल होंठों को पूरा खोल दिया।
उसके होंठ कांप रहे थे, फड़फड़ा रहे थे।
कादर ने देखा कि शिकार तैयार है।

उसने अपनी कमर को आगे धकेला।
"धप्प..."
उसका विशाल, गरम और चिकना सुपाड़ा (Tip) कामिनी के खुले होंठों से टकराया।
कामिनी को अपने होंठों पर आग और मांस का अहसास हुआ।
उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और उस मसालेदार टोप को चाट लिया।
"स्स्स्लर्प..."
तीखे मसालों का स्वाद और कादर की नमकीन त्वचा का स्वाद... यह नशा कामिनी के दिमाग को चढ़ गया।
उसने अपना मुंह और चौड़ा किया, अपनी जबड़े की हड्डियों को पूरा खोल दिया।

कादर ने धीरे से दबाब बनाया।
वह मोटा, लाल सुपाड़ा कामिनी के दांतों को पार करते हुए उसके मुंह में घुसता चला गया। 65573-domme-switch-wifey-adores-daddys-penis
कामिनी का मुंह छोटा पड़ रहा था, उसका गला भर गया था।
लेकिन वह उसे लेती गई... लेती गई...
उसका मुंह उस कसैले, मसालेदार और गरम लंड से भर गया।
कादर के मुँह से एक गहरी गुरराहट निकली— "आआआह्ह्ह्ह.... कामिनी...."
कामिनी की जीभ पागलों की तरह उस गरम लंड के नीचे की नसों को और उस सूप के स्वाद को चाटने लगी। उसकी नजरें कादर के वासना से भरे चेहरे पर टिकी हुई थी, आग की लाल रौशनी मे कामिनी का चेहरा दमक रहा था.
मटन सूप अब भगोने में नहीं... कामिनी के मुंह और कादर के लंड के बीच पक रहा था।
*******************

चूल्हे की आग धीमी हो चुकी थी, लेकिन मटन के भगोने में "खदबद-खदबद" की आवाज़ जारी थी।
और ठीक वैसी ही, बल्कि उससे भी ज्यादा गीली और गंदी आवाज़ कामिनी के मुंह से आ रही थी।
"फच्... फच्... ग्लोप... स्लर्प..."
कामिनी, जो अब चटाई पर घुटनों के बल आ गई थी, कादर के उस विशाल, मसालेदार और लोहे जैसे सख्त लंड से जूझ रही थी।
शुरुआत में उसे बहुत मुश्किल हुई।
कादर का 'औज़ार' इतना मोटा था कि कामिनी के जबड़े दुखने लगे थे। वह उसके मुंह में समा ही नहीं रहा था।

 उसका लाल, नंगा और चौड़ा टोप (Head) बार-बार कामिनी के दांतों से टकरा रहा था।
लेकिन कामिनी अब वो सभ्य घरेलु महिला नहीं थी, वो प्यासी शेरनी  बन चुकी थी।

उसने अपनी जीभ से उस मटन सूप के जायके और कादर के पौरुष के स्वाद को चाटा, जिससे उसका मुंह लिसलिसा हो गया।
और फिर... उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर उस 'मूसल' को अंदर खींचना शुरू किया।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, कामिनी की लय (Rhythm) बनती गई।
उसने अपने गालों को पिचकाया और एक वैक्यूम (Vacuum) बनाया।
"सुऊऊऊप्प..."
कादर का वह 10 इंच का राक्षस, कामिनी के गीले, गरम और तंग हलक में सरकता चला गया।
कामिनी का गला घुट रहा था, आँखों से पानी बह रहा था, नाक से सांस लेना मुश्किल हो रहा था... लेकिन वह रुक नहीं रही थी।

उसे वो 'ठूंसने' का अहसास पागल कर रहा था।
हर बार जब कादर का वो मसालेदार टोप उसके गले की घंटी (Uvula) से टकराता, कामिनी को उबकाई आती, लेकिन वह उसे दबाकर और जोर से चूसती।

कामिनी का मुंह पूरी तरह भरा हुआ था, इसलिए वह अपनी लार (Saliva) निगल नहीं पा रही थी।
उसके मुंह के कोनों से गाढ़ी, लिसलिसी और चिपचिपी राल (Drool) की धार बह निकली।
वह राल कादर के काले लंड पर तेल की तरह फिसलती हुई नीचे गिरी...
सीधे उसके विशाल, लटकते हुए अंडकोषों (टट्टो) पर।
कादर के टट्टे, जो पहले से ही पसीने और सूप की बूंदों से सने थे, अब कामिनी की गरम थूक से नहा गए।

कामिनी ने एक पल के लिए लंड को मुंह से बाहर निकाला— "प्लॉप!"
एक लंबी तार लंड और उसके होंठों के बीच खिंच गई।
सांस लेने के लिए नहीं... बल्कि उन टट्टों का इन्साफ करने के लिए।

कामिनी ने अपना चेहरा नीचे झुकाया। unnamed
उसने कादर के उन भारी-भरकम, साफ़-चिकने और गीले 'अंडों' को अपनी हथेलियों में भरा।
वे गरम थे और भारी थे।
कामिनी ने अपनी जीभ निकाली और उन टट्टों को चाटना शुरू किया।
नीचे से ऊपर तक... जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम चाटता है।
फिर उसने एक पूरा अंडकोष अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगी।
"स्स्स्लर्प... हम्मम्म..."
वह उन्हें चूम रही थी, चाट रही थी, अपने गालों से रगड़ रही थी। c27d9ec894641ee05b3a57ea3f433feb वह पूरी तरह पागल और वहशी हो गई थी। उसे कादर के जिस्म का हर एक हिस्सा अपने मुंह में चाहिए था।

और कादर?
कादर खान अपनी जगह पर किसी पहाड़ की तरह जमा खड़ा था।
उसकी टांगें चौड़ी थीं, ताकि कामिनी को खेलने के लिए पूरी जगह मिल सके।
उसकी आँखें आधी बंद थीं, और मुंह से "सी... सी..." की सिसकारी निकल रही थी।
लेकिन उसका ध्यान... अभी भी अपने 'काम' पर था।
हवस और वासना के इस तूफ़ान के बीच भी, कादर ने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं छोड़ी थी।

उसका एक हाथ (बायां हाथ) कामिनी के रेशमी बालों में उलझा हुआ था, जो उसके सिर को अपने लंड पर दबा रहा था।
लेकिन उसका दूसरा हाथ (दायां हाथ)... करछी चला रहा था।
कादर बीच-बीच में भगोने में करछी घुमाता, मटन को जलने से बचाता, और फिर अपनी कमर को कामिनी के मुंह में धकेल देता।

कादर पाक कला और यौनकला मे माहिर जान पड़ता था, उसे अहसास था समय के साथ पकवान को चलाया ना जाये तो वो जल जाता है.

यह दृश्य अद्भुत था। 
ऊपर एक आदमी मटन पका रहा है... और नीचे एक औरत उसका 'मीट' खा रही है। brunette-sucks-big-black-cock-deepthroat
कादर ने करछी चलाते हुए नीचे देखा।
कामिनी की हालत ख़राब थी—बाल बिखरे हुए, काजल फैला हुआ, मुंह थूक से सना हुआ, और वह पागलों की तरह उसके लंड पर सिर पटक रही थी। 20211009-204636

कादर के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई।
"आराम से मेरी जान... आराम से..." कादर ने कामिनी के बालों को सहलाया, और फिर करछी से मटन को पलटा।
"मटन अभी कच्चा है... लेकिन मेरा तो तुमने पूरा पका दिया है।"
कामिनी ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने बस ऊपर देखा... उसकी आँखें चढ़ी हुई थीं।
और उसने दोबारा अपना मुंह खोला और उस विशाल खंभे को जड़ तक अपने अंदर समा लिया।
"ग्लोप... ग्लोप... ग्लोप..."
अब उसे किसी के आने का डर नहीं था, रमेश का डर नहीं था... उसे बस यह लंड चाहिए था, अभी और इसी वक़्त।

भगोने में मटन पक चुका था, लेकिन बाहर जो 'पक' रहा था, वह अब जलने की कगार पर था।
कादर का विशाल शरीर कांपने लगा था।
उसकी जांघें थरथरा रही थीं।
कामिनी के मुंह का वह वैक्यूम (Vacuum) और उसकी जीभ की वो सर्कुलर मोशन कादर की बर्दाश्त के बाहर हो रही थी।
उसका 10 इंच का काला लोहा अब कामिनी के हलक की गहराई नाप रहा था।
उस पर लगा मटन सूप, कामिनी की लार, और कादर का अपना प्री-कम (Pre-cum)... सब मिलकर एक चिकना लुब्रिकेंट बन गए थे।

"फच्... फच्... ग्लोप...!"
कादर के मुंह से अब सिसकियों की जगह गुर्राहट निकल रही थी।
"ओह्ह्ह... कामिनी... बस... बस अब... मैं गया... मैं गया..."
कादर का हाथ कामिनी के बालों को जोर से भींच रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि उसका लावा अब नसों से होता हुआ ऊपर चढ़ रहा है।
वह फटने वाला था। वह अपनी "सफेद मलाई" कामिनी के हलक में भरने ही वाला था।
और नीचे?
कामिनी की हालत उससे भी बुरी थी।
उसका एक हाथ कादर की जांघ पर था, और दूसरा हाथ... अपनी साड़ी के अंदर।
वह घुटनों के बल बैठी थी, और उसका बायां हाथ अपनी दोनों जांघों के बीच तेज़ी से चल रहा था।
वह अपनी साड़ी के ऊपर से ही अपनी उभरी हुई योनि (Clitoris) को पागलों की तरह रगड़ रही थी।
उसके मुंह में कादर का लंड था, और नीचे उसकी उंगलियां।

दोहरी मार।
उसका पूरा शरीर अकड़ गया था। उसकी योनि संकुचित (Contract) हो रही थी। वह भी बस कुछ ही पलों में झड़ने (Climax) वाली थी।
दोनों एक साथ उस ऊंचाई पर थे जहाँ से गिरने पर सिर्फ़ मोक्ष मिलता है।

अगले 10 सेकंड में कादर की पिचकारी छूटने वाली थी और कामिनी की चीख निकलने वाली थी।
लेकिन तभी...

"धड़ड़ड़ड़ड़.......धड... धड... धड.... पी... पी... पो... पो....!!"
सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी और कर्कश आवाज़ आई।
घर के मुख्य लोहे के गेट को किसी ने ज़ोर से धक्का देकर खोला था।
और उसके तुरंत बाद...
"घुर्र्र्र्र्र्र........ पीं पीं!!"
एक भारी डीज़ल इंजन की गड़गड़ाहट और जीप का तेज़ हॉर्न।
वह आवाज़ स्टोर रूम के पिछवाड़े तक साफ़ सुनाई दी।
वह किसी आम कार की आवाज़ नहीं थी। वह पुलिस जीप की जानी-पहचानी, डरावनी आवाज़ थी।
शमशेर और रमेश आ गए थे।
उस आवाज़ ने उन दोनों के ऊपर बर्फ का ठंडा पानी डाल दिया।
कादर, जो झड़ने ही वाला था, एक पल के लिए पत्थर (Freeze) हो गया।
कामिनी, जो अपनी योनि रगड़ रही थी, उसका हाथ वहीं रुक गया।
एक सेकंड का सन्नाटा छाया रहा... जिसमें सिर्फ़ उनकी भारी सांसें सुनाई दे रही थीं।
फिर हकीकत ने जोर का झटका दिया।

"धम्म!!" (कार का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़)।
और फिर रमेश की आवाज़ गूंजी "अरे बंटी! गेट खोल बेटा... कामिनी कहाँ हो भई, दरवाजा खोलो..."
रमेश गार्डन से होता बंगले के मैन गेट को बाजा रहा था.

कामिनी की आँखों में नशा तुरंत डर में बदल गया।
उसने झटके से अपना मुंह पीछे खींचा।
"प्लॉप!"
कादर का विशाल, गीला और लाल लंड कामिनी के मुंह से बाहर निकल आया।

कामिनी के मुंह से और कादर के टोप से एक लंबी, गाढ़ी और चमकदार लार की तार जुड़ी हुई थी, जो खिंचती चली गई और अंत में टूटकर कादर के लटकते हुए टट्टों पर गिर गई।

कादर का लंड अभी भी लोहे की तरह खड़ा था। वह अभी भी चरम (Climax) पर था, उसे शांत होने में वक़्त लगता।
वह हवा में झूल रहा था, थूक और सूप से सना हुआ, कामिनी की तरफ इशारा करता हुआ।

कामिनी हड़बड़ाकर खड़ी हो गई।
उसकी टांगें कांप रही थीं। उसका ब्लाउज़ अभी भी खुला था, पल्लू गिरा हुआ था, और चेहरे पर "चूसने" के निशान थे—होंठ सूजे हुए और लाल।

"वो... वो आ गए..." कामिनी ने हांफते हुए फुसफुसाया। "रमेश... और शमशेर..."
उसने जल्दी से अपना पल्लू उठाया और अपने खुले हुए स्तनों को ढका।
उसने अपने होंठों को पल्लू से ज़ोर से पोंछा, ताकि कादर की लार और मटन सूप का निशान मिट जाए।
कादर भई सकपका गया, वो कितना ही बड़ा गुंडा हो लेकिन इस हालात मे पकडे जाने का अंजाम वो जनता था.

उसका 10 इंच का तंबू अभी भी खड़ा था। और उसने पहना क्या था? सिर्फ़ एक पारदर्शी सफ़ेद दुपट्टा।
अगर रमेश या शमशेर अभी यहाँ आ जाते, तो सब कुछ साफ़ दिख जाता, ऊपर से उसका खड़ा वो काला नाग।
उसे दर्द हो रहा था।
रुका हुआ वीर्य उसके अंडकोषों में दर्द पैदा कर रहा था। इसे 'Blue Balls' का दर्द कहते हैं।

"उफ्फ्फ..." कादर ने अपने लंड को मुट्ठी में भींच लिया।
"साला... इसी टाइम पर मरना था इनको..." कादर बड़बड़ाया।
"तुम... तुम संभालो..." कामिनी ने हड़बड़ाहट में कहा।
"मैं... मैं जाती हूँ, मै अंदर देखती हूँ..."
कामिनी ने एक आखिरी बार कादर के उस गीले, खड़े और अतृप्त (Unsatisfied) लंड को देखा।
उसकी आँखों में एक टीस थी— 'काश 1 मिनट और मिल जाता...'

कामिनी अपने बाल ठीक करती हुई, अपनी साड़ी संवारती हुई, तेज कदमों से घर के पिछले दरवाज़े की तरफ भागी।
उसे अब रमेश और शमशेर का सामना करना था।
और कादर?
कादर वहीं खड़ा था... हाथ में करछी, कमर पर दुपट्टा, और जांघों के बीच एक आग का गोला लिए।

कामिनी भागती हुई पिछले गेट से अंदर पहुंची ही थी, बंटी भागता हुआ, छत से नीचे सीढिया उतरता हुआ आ रहा था.
कमीनी की नजरें बंटी से मिली, कामिनी की हालात ख़राब थी, उसके चेहरे पे हवाइया उडी हुई थी.
"आप आपने कमरे मे जाओ, मै दरवाजा खोलता हूँ "
बंटी के अस्वसन से कामिनी हक्की बक्की रह गई, इसका मतलब बंटी छत से सब कुछ देख रहा रहा..
खेर अभी वक़्त नहीं था ये सब सोचने का, कामिनी अपने रूम मे पहुंच सीधा बाथरूम मे घुस गई.

क्रमशः...

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1 Comments

  1. Bhai mast update h roj ek update dete raho please

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